Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.155.12: व्यासजी बोले - "हे जीवित पुत्रों वाली पुत्रवधू! आपके पुत्र महामुनि धर्मराज युधिष्ठिर सदैव धर्म में तत्पर रहते हैं; अतः वे धर्म के बल से सम्पूर्ण पृथ्वी को जीतेंगे और संसार के समस्त राजाओं पर शासन करेंगे।" ॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.155: पाण्डवोंको व्यासजीका दर्शन और उनका एकचक्रा नगरीमें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यास उवाच
जीवत्पुत्रि सुतस्तेऽयं धर्मनित्यो युधिष्ठिर:।
धर्मेण पृथिवीं जित्वा महात्मा पुरुषर्षभ:।
पृथिव्यां पार्थिवान् सर्वान् प्रशासिष्यति धर्मराट्॥ १२॥
अनुवाद
व्यासजी बोले - "हे जीवित पुत्रों वाली पुत्रवधू! आपके पुत्र महामुनि धर्मराज युधिष्ठिर सदैव धर्म में तत्पर रहते हैं; अतः वे धर्म के बल से सम्पूर्ण पृथ्वी को जीतेंगे और संसार के समस्त राजाओं पर शासन करेंगे।" ॥12॥
Vyasa said, "Daughter-in-law who has living sons! Your son, the great sage Dharmaraja Yudhishthira, is always devoted to Dharma; therefore, he will conquer the entire earth by virtue of Dharma and rule over all the kings of the world." ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥