Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.155.11: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार पाण्डवों को पूर्ण आश्वासन देकर सत्यवतीनन्दन भगवान व्यास उनके साथ एकचक्रा नगरी को गये। वहाँ उन्होंने कुन्ती को इस प्रकार सान्त्वना दी॥11॥ | mahabharat अध्याय 1.155: पाण्डवोंको व्यासजीका दर्शन और उनका एकचक्रा नगरीमें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
एवं स तान् समाश्वास्य व्यास: सत्यवतीसुत:।
एकचक्रामभिगत: कुन्तीमाश्वासयत् प्रभु:॥ ११॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार पाण्डवों को पूर्ण आश्वासन देकर सत्यवतीनन्दन भगवान व्यास उनके साथ एकचक्रा नगरी को गये। वहाँ उन्होंने कुन्ती को इस प्रकार सान्त्वना दी॥11॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! In this way, after giving full assurance to the Pandavas, Satyavatinandan Lord Vyas went with them to the city of Ekachakra. There he consoled Kunti in this way. 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥