Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.154.d8-d15: 'मैं महान् काम-पीड़ा से पीड़ित स्त्री हूँ, अतः आप मेरी भी रक्षा करें। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन सभी उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जो लोग शरण में आते हैं, उन पर संतजन दया करते हैं। धर्मप्रेमी महर्षि दया को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म मानते हैं। मैं अपने दिव्य ज्ञान से भूत और भविष्य की घटनाओं को देखता हूँ। अतः मैं तुम्हारे कल्याण के विषय में कह रहा हूँ। यहाँ से थोड़ी दूरी पर एक सुंदर सरोवर है। तुम सब आज वहाँ जाओ, उस सरोवर में स्नान करो और एक वृक्ष के नीचे विश्राम करो। कुछ दिनों के बाद कमलनयन व्यासजी के दर्शन पाकर तुम शोक से मुक्त हो जाओगे। उन्होंने अपनी बुद्धि से जान लिया है कि तुम सब दुर्योधन द्वारा हस्तिनापुर से निकाले गए थे, वारणावत नगर में जलाए गए थे और विदुरजी के प्रयास से तुम सब बच गए थे। वे महात्मा व्यास शालिहोत्र मुनि के आश्रम में रहेंगे। उनके आश्रम में वह पवित्र वृक्ष शीत, ताप और वर्षा को भली-भाँति सहन कर सकता है। वहाँ जल पीने मात्र से भूख-प्यास मिट जाती है।' ऋषि शालिहोत्र ने अपनी तपस्या से उक्त सरोवर और वृक्ष की रचना की थी। वहाँ कदंब, सारस, हंस, कुररी और कुरार आदि पक्षी संगीतमय स्वर के साथ मधुर गान गाते रहते हैं। | mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'मैं महान् काम-पीड़ा से पीड़ित स्त्री हूँ, अतः आप मेरी भी रक्षा करें। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन सभी उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए जो लोग शरण में आते हैं, उन पर संतजन दया करते हैं। धर्मप्रेमी महर्षि दया को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म मानते हैं। मैं अपने दिव्य ज्ञान से भूत और भविष्य की घटनाओं को देखता हूँ। अतः मैं तुम्हारे कल्याण के विषय में कह रहा हूँ। यहाँ से थोड़ी दूरी पर एक सुंदर सरोवर है। तुम सब आज वहाँ जाओ, उस सरोवर में स्नान करो और एक वृक्ष के नीचे विश्राम करो। कुछ दिनों के बाद कमलनयन व्यासजी के दर्शन पाकर तुम शोक से मुक्त हो जाओगे। उन्होंने अपनी बुद्धि से जान लिया है कि तुम सब दुर्योधन द्वारा हस्तिनापुर से निकाले गए थे, वारणावत नगर में जलाए गए थे और विदुरजी के प्रयास से तुम सब बच गए थे। वे महात्मा व्यास शालिहोत्र मुनि के आश्रम में रहेंगे। उनके आश्रम में वह पवित्र वृक्ष शीत, ताप और वर्षा को भली-भाँति सहन कर सकता है। वहाँ जल पीने मात्र से भूख-प्यास मिट जाती है।' ऋषि शालिहोत्र ने अपनी तपस्या से उक्त सरोवर और वृक्ष की रचना की थी। वहाँ कदंब, सारस, हंस, कुररी और कुरार आदि पक्षी संगीतमय स्वर के साथ मधुर गान गाते रहते हैं।
‘I am a woman suffering from great sexual anguish, so please protect me too. Saints show mercy to those who seek refuge for the attainment of all the aims of Dharma, Artha, Kama and Moksha. Maharishis who love Dharma consider mercy to be the best Dharma. I see the events of the past and the future with my divine knowledge. So I am telling you about your welfare. There is a beautiful lake at a little distance from here. You all go there today, take a bath in that lake and rest under a tree. After a few days, you will be free from grief after getting the darshan of Kamalnayan Vyasji. He has come to know through his wisdom that you all were expelled from Hastinapur by Duryodhan, were burnt in the city of Varanavat and you all were saved by the efforts of Vidurji. He will stay in the ashram of Mahatma Vyas Shalihotra Muni. That sacred tree in his ashram can tolerate cold, heat and rain very well. Hunger and thirst are relieved by just drinking water there. The sage Shalihotra created the aforementioned lake and tree through his penance. There the birds like Kadamba, crane, swan, Kurri and Kurar keep singing sweet songs mixed with the sound of music.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥