Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.154.d5-12: 'जब कभी तुम मन में मेरा स्मरण करोगी, तब मैं तुम्हें सदैव इच्छित स्थानों पर पहुँचा दूँगी। आर्य! मैं न तो यातुधानी हूँ, न राक्षसी। महारानी! मैं राक्षस कुल की सुशील कन्या हूँ और मेरा नाम सालकटंकटी है। मुझमें देवताओं के समान तेज है और मैं यौवन से संपन्न हूँ। मेरा हृदय आपके पुत्र भीमसेन से मिल गया है। मैं वृकोदर को अपने सम्मुख रखकर आपकी सेवा में उपस्थित रहूँगी। यदि तुम असावधान भी रहोगी, तो भी मैं पूरी सावधानी के साथ आपकी सेवा में तत्पर रहूँगी। मैं तुम्हें संकटों से बचाऊँगी। यदि तुम दुर्गम एवं कठिन स्थानों में शीघ्र ही अपने इच्छित स्थान पर पहुँचना चाहती हो, तो मैं तुम सबको अपनी पीठ पर बिठाकर वहाँ ले जाऊँगी। तुम सब मुझ पर कृपा करो, जिससे भीमसेन मुझे स्वीकार कर लें।' | mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'जब कभी तुम मन में मेरा स्मरण करोगी, तब मैं तुम्हें सदैव इच्छित स्थानों पर पहुँचा दूँगी। आर्य! मैं न तो यातुधानी हूँ, न राक्षसी। महारानी! मैं राक्षस कुल की सुशील कन्या हूँ और मेरा नाम सालकटंकटी है। मुझमें देवताओं के समान तेज है और मैं यौवन से संपन्न हूँ। मेरा हृदय आपके पुत्र भीमसेन से मिल गया है। मैं वृकोदर को अपने सम्मुख रखकर आपकी सेवा में उपस्थित रहूँगी। यदि तुम असावधान भी रहोगी, तो भी मैं पूरी सावधानी के साथ आपकी सेवा में तत्पर रहूँगी। मैं तुम्हें संकटों से बचाऊँगी। यदि तुम दुर्गम एवं कठिन स्थानों में शीघ्र ही अपने इच्छित स्थान पर पहुँचना चाहती हो, तो मैं तुम सबको अपनी पीठ पर बिठाकर वहाँ ले जाऊँगी। तुम सब मुझ पर कृपा करो, जिससे भीमसेन मुझे स्वीकार कर लें।'
‘Whenever you remember me in your mind, I will always take you to the desired places. Arya! I am neither a Yaatudhaani nor a demon. Queen! I am a well behaved girl of the demon race and my name is Salakatankaati. I have the radiance like the gods and am blessed with youth. My heart has met your son Bhimasena. I will keep Vrikodara in front of me and will be present in your service. Even if you are careless, I will remain engaged in your service with full caution. I will save you from dangers. If you want to reach your desired destination quickly in inaccessible and difficult places, then I will take you all there by carrying you on my back. You all should be kind to me, so that Bhimasena accepts me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥