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mahabharat 1.154.8: 'यशस्विनी! यदि ये वीर भीमसेन या आप मेरी इस प्रार्थना को अस्वीकार कर दें, तो मैं जीवित नहीं रह सकूँगा। मैं आपसे यह सत्य कह रहा हूँ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.154.8 
वीरेणाहं तथानेन त्वया चापि यशस्विनि।
प्रत्याख्याता न जीवामि सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'यशस्विनी! यदि ये वीर भीमसेन या आप मेरी इस प्रार्थना को अस्वीकार कर दें, तो मैं जीवित नहीं रह सकूँगा। मैं आपसे यह सत्य कह रहा हूँ॥8॥
 
'Yashaswini! If this brave Bhimsen or you reject this request of mine, then I will not be able to survive. I am telling you this truth.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)