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mahabharat 1.154.7: 'शुभकामनाएँ! मैंने अपने शुभचिंतकों, सम्बन्धियों और स्वधर्म का परित्याग करके आपके पुत्र पुरुषसिंह भीमसेन को पति के रूप में वरण किया है। 7॥   |   mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.154.7 
मया ह्युत्सृज्य सुहृद: स्वधर्मं स्वजनं तथा।
वृतोऽयं पुरुषव्याघ्रस्तव पुत्र: पति: शुभे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'शुभकामनाएँ! मैंने अपने शुभचिंतकों, सम्बन्धियों और स्वधर्म का परित्याग करके आपके पुत्र पुरुषसिंह भीमसेन को पति के रूप में वरण किया है। 7॥
 
'Good luck! I have abandoned my well-wishers, relatives and my own religion and have chosen your son Purushasingh Bhimsen as my husband. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)