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mahabharat 1.154.46: महामना इन्द्र ने अतुलित पराक्रमी कर्ण के पराक्रम का दंश सहने के लिए घटोत्कच को उत्पन्न किया था। वह कर्ण के विरुद्ध युद्ध करने में समर्थ एक महारथी था। 46॥   |   mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.154.46 
स हि सृष्टो मघवता शक्तिहेतोर्महात्मना।
कर्णस्याप्रतिवीर्यस्य प्रतियोद्धा महारथ:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
महामना इन्द्र ने अतुलित पराक्रमी कर्ण के पराक्रम का दंश सहने के लिए घटोत्कच को उत्पन्न किया था। वह कर्ण के विरुद्ध युद्ध करने में समर्थ एक महारथी था। 46॥
 
Mahamana Indra had created Ghatotkacha to bear the brunt of the power of the incomparably mighty Karna. He was a great warrior capable of fighting against Karna. 46॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि हिडिम्बवधपर्वणि घटोत्कचोत्पत्तौ चतुष्पञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत हिडिम्बवधपर्वमें घटोत्कचकी उत्पत्तिविषयक एक सौ चौवनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५४॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३३ श्लोक मिलाकर कुल ७९ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)