Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.154.44: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! कुन्ती की यह बात सुनकर घटोत्कच ने उन्हें प्रणाम किया और कहा - 'दादी! जिस प्रकार इस लोक में रावण और मेघनाद महान् बलशाली थे, उसी प्रकार इस मनुष्य लोक में मैं भी उनके समान ही विशाल और बलशाली हूँ; बल्कि मैं उनसे भी महान हूँ।' | mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! कुन्ती की यह बात सुनकर घटोत्कच ने उन्हें प्रणाम किया और कहा - 'दादी! जिस प्रकार इस लोक में रावण और मेघनाद महान् बलशाली थे, उसी प्रकार इस मनुष्य लोक में मैं भी उनके समान ही विशाल और बलशाली हूँ; बल्कि मैं उनसे भी महान हूँ।'
Vaishmpayana says - Janamejaya! On hearing Kunti say this, Ghatotkacha bowed down to her and said - 'Grandmother! Just as Ravan and Meghnad were very powerful in this world, in the same way in this human world I am also as huge and powerful as them; in fact I am even greater than them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥