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mahabharat 1.154.43: ‘पुत्र! तुम कुरुवंश में उत्पन्न हुए हो। मेरे लिए तुम स्वयं भीमसेन के समान हो। तुम पाँचों पाण्डवों में सबसे बड़े पुत्र हो, अतः हमारी सहायता करो।’॥43॥   |   mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.154.43 
त्वं कुरूणां कुले जात: साक्षाद् भीमसमो ह्यसि।
ज्येष्ठ: पुत्रोऽसि पञ्चानां साहाय्यं कुरु पुत्रक॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
‘पुत्र! तुम कुरुवंश में उत्पन्न हुए हो। मेरे लिए तुम स्वयं भीमसेन के समान हो। तुम पाँचों पाण्डवों में सबसे बड़े पुत्र हो, अतः हमारी सहायता करो।’॥43॥
 
‘Son! You were born in the Kuru clan. For me you are like Bhimasena himself. You are the eldest son of the five Pandavas, so please help us.’॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)