Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.154.41-42: तत्पश्चात् महाबली घटोत्कच ने कुन्तीसहित पाण्डवों को प्रणाम करके उनसे कहा - 'हे भोले गुरुजनों! आप बिना किसी संकोच के मुझे बताइये कि मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?' कुन्ती ने प्रश्न करने वाले भीमसेनपुत्र से कहा - ॥41-42॥   |   mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  1.154.41-42 
घटोत्कचो महाकाय: पाण्डवान् पृथया सह।
अभिवाद्य यथान्यायमब्रवीच्च प्रभाष्य तान्॥ ४१॥
किं करोम्यहमार्याणां नि:शङ्कं वदतानघा:।
तं ब्रुवन्तं भैमसेनिं कुन्ती वचनमब्रवीत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली घटोत्कच ने कुन्तीसहित पाण्डवों को प्रणाम करके उनसे कहा - 'हे भोले गुरुजनों! आप बिना किसी संकोच के मुझे बताइये कि मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?' कुन्ती ने प्रश्न करने वाले भीमसेनपुत्र से कहा - ॥41-42॥
 
Thereafter the gigantic Ghatotkacha, after paying his obeisance to the Pandavas including Kunti, addressed them and said, 'Innocent teachers! Please tell me without any hesitation, what service can I render to you?' Kunti said to the son of Bhimasena who asked this question -॥ 41-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)