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mahabharat 1.154.39: घटोत्कच पांडवों से बहुत स्नेह करता था और उन्हें बहुत प्रिय भी था। वह सदैव उनके अधीन रहता था। 39.   |   mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.154.39 
अनुरक्तश्च तानासीत् पाण्डवान् स घटोत्कच:।
तेषां च दयितो नित्यमात्मनित्यो बभूव ह॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
घटोत्कच पांडवों से बहुत स्नेह करता था और उन्हें बहुत प्रिय भी था। वह सदैव उनके अधीन रहता था। 39.
 
Ghatotkacha had great affection for the Pandavas and was also very dear to the Pandavas. He always remained under their command. 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)