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mahabharat 1.154.19: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! 'बहुत अच्छा' कहकर भीमसेन ने वैसा ही करने की प्रतिज्ञा की (और गन्धर्व-विवाह किया)। तत्पश्चात् भीमसेन हिडिम्बा से इस प्रकार बोले - 'राक्षस! सुनो, मैं सत्य की शपथ लेकर तुम्हारे सामने एक शर्त रखता हूँ॥ 19॥   |   mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.154.19 
वैशम्पायन उवाच
तथेति तत् प्रतिज्ञाय भीमसेनोऽब्रवीदिदम्।
शृणु राक्षसि सत्येन समयं ते वदाम्यहम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! 'बहुत अच्छा' कहकर भीमसेन ने वैसा ही करने की प्रतिज्ञा की (और गन्धर्व-विवाह किया)। तत्पश्चात् भीमसेन हिडिम्बा से इस प्रकार बोले - 'राक्षस! सुनो, मैं सत्य की शपथ लेकर तुम्हारे सामने एक शर्त रखता हूँ॥ 19॥
 
Vaishampayana says - Janamejaya! Saying 'very good', Bhimasena vowed to do the same (and married Hidimba in Gandharva style). After that Bhimasena spoke to Hidimba in this way - 'Demon! Listen, I swear on truth and put a condition before you.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)