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mahabharat 1.154.18: तुम मन के समान तीव्र गति से चलते हो, इसलिए दिन में तो तुम उनके साथ जैसे चाहो वैसे बिता सकते हो, परंतु रात्रि में भीमसेन को सदैव हमारे पास भेज देना।॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.154.18 
अहस्सु विहरानेन यथाकामं मनोजवा।
अयं त्वानयितव्यस्ते भीमसेन: सदा निशि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तुम मन के समान तीव्र गति से चलते हो, इसलिए दिन में तो तुम उनके साथ जैसे चाहो वैसे बिता सकते हो, परंतु रात्रि में भीमसेन को सदैव हमारे पास भेज देना।॥18॥
 
You move as fast as the mind, so you may spend the day with them as you please, but at night you must always send Bhimasena to us.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)