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mahabharat 1.154.13: जो भी साधन संकट से छुटकारा दिलाने वाला तथा प्राण बचाने वाला हो, धर्मपरायण मनुष्य को उसे ग्रहण कर उसका प्रयोग करना चाहिए ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.154.13 
आपदस्तरणे प्राणान् धारयेद् येन तेन वा।
सर्वमावृत्य कर्तव्यं तं धर्ममनुवर्तता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जो भी साधन संकट से छुटकारा दिलाने वाला तथा प्राण बचाने वाला हो, धर्मपरायण मनुष्य को उसे ग्रहण कर उसका प्रयोग करना चाहिए ॥13॥
 
'Whatever means can relieve one from a problem and save one's life, a person following Dharma should accept it and use it. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)