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mahabharat 1.154.10: हे महाभाग! कृपया मुझे अपने पुत्र, जो मेरे चुने हुए पति हैं, से मिलने का अवसर दीजिए। मैं अपने पति के इस दिव्य रूप को अपने इच्छित स्थान पर ले जाऊँगी और नियत समय पर उसे आपके पास वापस लाऊँगी। हे शुभे! मुझ पर विश्वास कीजिए।   |   mahabharat अध्याय 1.154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भीमसेनको हिडिम्बाके वधसे रोकना, हिडिम्बाकी भीमसेनके लिये प्रार्थना, भीमसेन और हिडिम्बाका मिलन तथा घटोत्कचकी उत्पत्ति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.154.10 
भर्त्रानेन महाभागे संयोजय सुतेन ह।
तमुपादाय गच्छेयं यथेष्टं देवरूपिणम्।
पुनश्चैवानयिष्यामि विस्रम्भं कुरु मे शुभे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे महाभाग! कृपया मुझे अपने पुत्र, जो मेरे चुने हुए पति हैं, से मिलने का अवसर दीजिए। मैं अपने पति के इस दिव्य रूप को अपने इच्छित स्थान पर ले जाऊँगी और नियत समय पर उसे आपके पास वापस लाऊँगी। हे शुभे! मुझ पर विश्वास कीजिए।
 
‘O great one! Please give me an opportunity to meet your son, who is my chosen husband. I will take this divine form of my husband to my desired place and bring him back to you at the appointed time. O Shubhe! Please trust me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)