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mahabharat 1.153.9: तत्पश्चात् मैंने आपके महाबली पुत्र को पति रूप में स्वीकार किया और उसके साथ (और आप सबके साथ) यहाँ से अन्यत्र भागने का प्रयत्न किया, किन्तु आपके पुत्र की अनुमति न मिलने के कारण मैं इस कार्य में सफल न हो सकी॥ 9॥   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.153.9 
ततो वृतो मया भर्ता तव पुत्रो महाबल:।
अपनेतुं च यतितो न चैव शकितो मया॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मैंने आपके महाबली पुत्र को पति रूप में स्वीकार किया और उसके साथ (और आप सबके साथ) यहाँ से अन्यत्र भागने का प्रयत्न किया, किन्तु आपके पुत्र की अनुमति न मिलने के कारण मैं इस कार्य में सफल न हो सकी॥ 9॥
 
Thereafter I accepted your mighty son as my husband and tried to escape from here with him (and all of you) to some other place, but as I did not get the permission of your son I was not successful in this task.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)