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mahabharat 1.153.8: शुभ! उसे देखकर समस्त प्राणियों के हृदय में विचरण करने वाले कामदेव की प्रेरणा से मैं आपके पुत्र का दास बन गया॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.153.8 
ततोऽहं सर्वभूतानां भावे विचरता शुभे।
चोदिता तव पुत्रस्य मन्मथेन वशानुगा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
शुभ! उसे देखकर समस्त प्राणियों के हृदय में विचरण करने वाले कामदेव की प्रेरणा से मैं आपके पुत्र का दास बन गया॥8॥
 
Shubh! On seeing him, inspired by Kaamdev (the god of love) who roams in the hearts of all beings, I became the slave of your son. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)