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mahabharat 1.153.5: हिडिम्बा बोली - देवी! यह जो विशाल वन आप देख रही हैं, जो नीले बादल के समान दिखाई देता है, यह राक्षसी हिडिम्बा और मेरा निवास स्थान है।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.153.5 
हिडिम्बोवाच
यदेतत् पश्यसि वनं नीलमेघनिभं महत्।
निवासो राक्षसस्यैष हिडिम्बस्य ममैव च॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हिडिम्बा बोली - देवी! यह जो विशाल वन आप देख रही हैं, जो नीले बादल के समान दिखाई देता है, यह राक्षसी हिडिम्बा और मेरा निवास स्थान है।॥5॥
 
Hidimba said - Goddess! This vast forest that you are seeing, which looks like a blue cloud, is the abode of the demon Hidimba and me. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)