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mahabharat 1.153.31: भीमसेन द्वारा इस प्रकार मारे जाने पर राक्षस जोर-जोर से चिल्लाने लगा, जिससे सारा वन जल में भीगे हुए ढोल की ध्वनि से गूंज उठा।   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.153.31 
स मार्यमाणो भीमेन ननाद विपुलं स्वनम्।
पूरयंस्तद् वनं सर्वं जलार्द्र इव दुन्दुभि:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन द्वारा इस प्रकार मारे जाने पर राक्षस जोर-जोर से चिल्लाने लगा, जिससे सारा वन जल में भीगे हुए ढोल की ध्वनि से गूंज उठा।
 
After being thus struck by Bhimasena the demon began to scream loudly, making the entire forest reverberate with the sound of a drum soaked in water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)