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mahabharat 1.153.30: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! अर्जुन की यह बात सुनकर भीमसेन अत्यन्त क्रोधित हो गये। उन्होंने उस राक्षस को बलपूर्वक भूमि पर पटक दिया और उसे पशु की भाँति रगड़-रगड़कर पीटने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.153.30 
वैशम्पायन उवाच
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा भीमसेनोऽत्यमर्षण:।
निष्पिष्यैनं बलाद् भूमौ पशुमारममारयत्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! अर्जुन की यह बात सुनकर भीमसेन अत्यन्त क्रोधित हो गये। उन्होंने उस राक्षस को बलपूर्वक भूमि पर पटक दिया और उसे पशु की भाँति रगड़-रगड़कर पीटने लगे।
 
Vaishampayana says - Janamejaya! On hearing this from Arjuna, Bhimasena became very angry. He forcefully threw the demon on the ground and started beating him like an animal by rubbing him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)