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mahabharat 1.153.28: अर्जुन ने कहा- भैया! यदि तुम इस राक्षस को युद्ध में अपने लिए भार समझते हो, तो मैं तुम्हारी सहायता करूँगा। तुम शीघ्र ही इसका वध कर दो॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.153.28 
अर्जुन उवाच
यदि वा मन्यसे भारं त्वमिमं राक्षसं युधि।
करोमि तव साहाय्यं शीघ्रमेष निपात्यताम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन ने कहा- भैया! यदि तुम इस राक्षस को युद्ध में अपने लिए भार समझते हो, तो मैं तुम्हारी सहायता करूँगा। तुम शीघ्र ही इसका वध कर दो॥ 28॥
 
Arjun said- Brother! If you consider this demon a burden for you in the war, then I will help you. You kill him quickly.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)