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mahabharat 1.153.22: उधर, पूर्व दिशा में सूर्योदय की लालिमा फैल रही है। सुबह और शाम होने वाली है। इस भीषण क्षण में राक्षस और भी प्रबल हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.153.22 
पुरा संरज्यते प्राची पुरा संध्या प्रवर्तते।
रौद्रे मुहूर्ते रक्षांसि प्रबलानि भवन्त्युत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उधर, पूर्व दिशा में सूर्योदय की लालिमा फैल रही है। सुबह और शाम होने वाली है। इस भीषण क्षण में राक्षस और भी प्रबल हो जाते हैं।
 
On the other side, the redness of sunrise is spreading in the east. It is about to be morning and evening. In this fierce moment, the demons become stronger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)