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mahabharat 1.153.21: अर्जुन बोले, "हे शत्रुओं का नाश करने वाले भीम! इस पापी राक्षस को अधिक समय तक जीवित रखने से क्या लाभ है? हमें आगे बढ़ना है, अतः यहाँ अधिक समय तक रुकना संभव नहीं है।" ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.153.21 
अर्जुन उवाच
किमनेन चिरं भीम जीवता पापरक्षसा।
गन्तव्ये न चिरं स्थातुमिह शक्यमरिंदम॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले, "हे शत्रुओं का नाश करने वाले भीम! इस पापी राक्षस को अधिक समय तक जीवित रखने से क्या लाभ है? हमें आगे बढ़ना है, अतः यहाँ अधिक समय तक रुकना संभव नहीं है।" ॥21॥
 
Arjuna said, "O Bhima, destroyer of enemies! What is the use of keeping this sinful demon alive for long? We have to move forward, so it is not possible to stay here for long." ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)