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mahabharat 1.153.2-3: तत्पश्चात् कुन्ती ने उसकी सुन्दरता देखकर आश्चर्यचकित होकर उसे सान्त्वना देते हुए मधुर वाणी में पूछा, 'हे दिव्य कन्या के समान कान्ति वाली सुन्दरी! तुम कौन हो और किसकी पुत्री हो? तुम यहाँ क्यों आई हो और कहाँ से आई हो?॥ 2-3॥   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.153.2-3 
तत: कुन्ती समीक्ष्यैनां विस्मिता रूपसम्पदा।
उवाच मधुरं वाक्यं सान्त्वपूर्वमिदं शनै:॥ २॥
कस्य त्वं सुरगर्भाभे का वासि वरवर्णिनी।
केन कार्येण सम्प्राप्ता कुतश्चागमनं तव॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् कुन्ती ने उसकी सुन्दरता देखकर आश्चर्यचकित होकर उसे सान्त्वना देते हुए मधुर वाणी में पूछा, 'हे दिव्य कन्या के समान कान्ति वाली सुन्दरी! तुम कौन हो और किसकी पुत्री हो? तुम यहाँ क्यों आई हो और कहाँ से आई हो?॥ 2-3॥
 
Thereafter Kunti, astonished at her beauty, looking at her and consoling her, asked her in a sweet voice, 'Beautiful lady with the radiance of a celestial maiden! Who are you and whose daughter are you? Why have you come here and from where have you come?॥ 2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)