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mahabharat 1.153.19: 'कुन्तीनन्दन! अब मैं आपकी सहायता के लिए यहाँ हूँ। मैं इस राक्षस का अवश्य वध करूँगा। नकुल और सहदेव माता की रक्षा करेंगे।'॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.153.19 
साहाय्येऽस्मि स्थित: पार्थ पातयिष्यामि राक्षसम्।
नकुल: सहदेवश्च मातरं गोपयिष्यत:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
'कुन्तीनन्दन! अब मैं आपकी सहायता के लिए यहाँ हूँ। मैं इस राक्षस का अवश्य वध करूँगा। नकुल और सहदेव माता की रक्षा करेंगे।'॥19॥
 
'Kuntinandan! Now I am here to help you. I will surely kill this demon. Nakul and Sahadeva will protect mother.'॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)