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mahabharat 1.153.14: तत्पश्चात् उसने देखा कि वे दोनों भयंकर और शक्तिशाली सिंहों के समान आपस में उलझे हुए हैं और विजय की चाह में एक-दूसरे को घसीट रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.153.14 
तौ ते ददृशुरासक्तौ विकर्षन्तौ परस्परम्।
काङ्क्षमाणौ जयं चैव सिंहाविव बलोत्कटौ॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने देखा कि वे दोनों भयंकर और शक्तिशाली सिंहों के समान आपस में उलझे हुए हैं और विजय की चाह में एक-दूसरे को घसीट रहे हैं।
 
Thereafter he saw that both of them, like fierce and powerful lions, were entangled together and were dragging each other, seeking victory.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)