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mahabharat 1.153.13: वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! हिडिम्बा के ये वचन सुनकर युधिष्ठिर उछलकर खड़े हो गए। अर्जुन, नकुल और पराक्रमी सहदेव भी वैसा ही करने लगे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 153: हिडिम्बाका कुन्ती आदिसे अपना मनोभाव प्रकट करना तथा भीमसेनके द्वारा हिडिम्बासुरका वध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.153.13 
वैशम्पायन उवाच
तस्या: श्रुत्वैव वचनमुत्पपात युधिष्ठिर:।
अर्जुनो नकुलश्चैव सहदेवश्च वीर्यवान्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! हिडिम्बा के ये वचन सुनकर युधिष्ठिर उछलकर खड़े हो गए। अर्जुन, नकुल और पराक्रमी सहदेव भी वैसा ही करने लगे॥13॥
 
Vaishampayana says- Janamejaya! On hearing these words of Hidimba, Yudhishthira jumped up and stood up. Arjuna, Nakula and the valiant Sahadeva also did the same.॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)