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श्लोक 1.152.28  |
मयि तिष्ठति दुष्टात्मन् न स्त्रियं हन्तुमर्हसि।
संगच्छस्व मया सार्धमेकेनैको नराशन॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| हे दुष्टात्मा! मेरे रहते हुए तू इस स्त्री को नहीं मार सकता। नरभक्षी राक्षस! तू मुझसे अकेले युद्ध कर।॥28॥ |
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| ‘Evil soul! You cannot kill this woman while I am here. Cannibal demon! Fight me alone.॥ 28॥ |
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