Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.152.26-27: हे राक्षसों का यश नष्ट करने वाली दुष्ट हिडिम्बा! तुम्हारी यह बहन तुम्हारे आदेश से ही यहाँ आई है; किन्तु मेरा रूप देखकर यह बेचारी मुझ पर मोहित हो गई है, अतः यह तुम्हारा कोई अहित नहीं कर रही है। कामदेव के अहित के लिए तुम्हें इसकी निन्दा नहीं करनी चाहिए॥ 26-27॥ | mahabharat अध्याय 1.152: हिडिम्बका आना, हिडिम्बाका उससे भयभीत होना और भीम तथा हिडिम्बासुरका युद्ध । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राक्षसों का यश नष्ट करने वाली दुष्ट हिडिम्बा! तुम्हारी यह बहन तुम्हारे आदेश से ही यहाँ आई है; किन्तु मेरा रूप देखकर यह बेचारी मुझ पर मोहित हो गई है, अतः यह तुम्हारा कोई अहित नहीं कर रही है। कामदेव के अहित के लिए तुम्हें इसकी निन्दा नहीं करनी चाहिए॥ 26-27॥
‘You wicked Hidimba, who ruins the fame of demons! This sister of yours has come here only by your order; but on seeing my beauty, this poor girl has started liking me, so she is not doing any wrong to you. You should not condemn her for the wrong done by Kamadeva.॥ 26-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥