श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 152: हिडिम्बका आना, हिडिम्बाका उससे भयभीत होना और भीम तथा हिडिम्बासुरका युद्ध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.152.22 
वैशम्पायन उवाच
भीमसेनस्तु तं दृष्ट्वा राक्षसं प्रहसन्निव।
भगिनीं प्रति संक्रुद्धमिदं वचनमब्रवीत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! अपनी बहन पर अत्यन्त कुपित हुए उस राक्षस की ओर देखकर भीमसेन हँसते हुए बोले -॥22॥
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! Looking at that demon who was very angry with his sister, Bhimasena spoke as if laughing -॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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