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mahabharat 1.152.2: उसकी आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं, भुजाएँ बड़ी-बड़ी थीं, बाल ऊपर की ओर उठे हुए थे और चेहरा बहुत बड़ा था। उसके शरीर का रंग इतना काला था, मानो आकाश में काले बादल छा गए हों। तीखे दाँतों वाला वह राक्षस बहुत डरावना लग रहा था।   |   mahabharat अध्याय 1.152: हिडिम्बका आना, हिडिम्बाका उससे भयभीत होना और भीम तथा हिडिम्बासुरका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 152: हिडिम्बका आना, हिडिम्बाका उससे भयभीत होना और भीम तथा हिडिम्बासुरका युद्ध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.152.2 
लोहिताक्षो महाबाहुरूर्ध्वकेशो महानन:।
मेघसंघातवर्ष्मा च तीक्ष्णदंष्ट्रो भयानक:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसकी आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं, भुजाएँ बड़ी-बड़ी थीं, बाल ऊपर की ओर उठे हुए थे और चेहरा बहुत बड़ा था। उसके शरीर का रंग इतना काला था, मानो आकाश में काले बादल छा गए हों। तीखे दाँतों वाला वह राक्षस बहुत डरावना लग रहा था।
 
His eyes were turning red with anger, his arms were huge, his hair was raised upwards and his face was huge. The colour of his body was so black, as if dark clouds were covering the sky. That demon with sharp teeth looked very scary.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)