Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.152.13-14: (इसके बाद) उसने अपनी बहन के मानव रूप को देखा । उसकी चोटी में फूलों की मालाएँ थीं । उसका मुख पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर था । उसकी भौहें, नाक, आँखें और केश - सभी सुन्दर थे । उसके नख और त्वचा अत्यंत कोमल थे । उसने अपने शरीर को नाना प्रकार के आभूषणों से सुसज्जित कर रखा था और एक अत्यंत सुन्दर महीन साड़ी उसके शरीर को सुशोभित कर रही थी ॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 1.152: हिडिम्बका आना, हिडिम्बाका उससे भयभीत होना और भीम तथा हिडिम्बासुरका युद्ध । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(इसके बाद) उसने अपनी बहन के मानव रूप को देखा । उसकी चोटी में फूलों की मालाएँ थीं । उसका मुख पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर था । उसकी भौहें, नाक, आँखें और केश - सभी सुन्दर थे । उसके नख और त्वचा अत्यंत कोमल थे । उसने अपने शरीर को नाना प्रकार के आभूषणों से सुसज्जित कर रखा था और एक अत्यंत सुन्दर महीन साड़ी उसके शरीर को सुशोभित कर रही थी ॥13-14॥
(After that) he looked at his sister's human form. She had garlands of flowers in her braid. Her face looked beautiful like the full moon. Her eyebrows, nose, eyes and hair - all were beautiful. Her nails and skin were very delicate. She had decorated her body with all kinds of ornaments and a very beautiful fine sari was adorning her body.॥13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥