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श्लोक 1.152.13-14  |
अवेक्षमाणस्तस्याश्च हिडिम्बो मानुषं वपु:।
स्रग्दामपूरितशिखं समग्रेन्दुनिभाननम्॥ १३॥
सुभ्रूनासाक्षिकेशान्तं सुकुमारनखत्वचम्।
सर्वाभरणसंयुक्तं सुसूक्ष्माम्बरवाससम्॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| (इसके बाद) उसने अपनी बहन के मानव रूप को देखा । उसकी चोटी में फूलों की मालाएँ थीं । उसका मुख पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर था । उसकी भौहें, नाक, आँखें और केश - सभी सुन्दर थे । उसके नख और त्वचा अत्यंत कोमल थे । उसने अपने शरीर को नाना प्रकार के आभूषणों से सुसज्जित कर रखा था और एक अत्यंत सुन्दर महीन साड़ी उसके शरीर को सुशोभित कर रही थी ॥13-14॥ |
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| (After that) he looked at his sister's human form. She had garlands of flowers in her braid. Her face looked beautiful like the full moon. Her eyebrows, nose, eyes and hair - all were beautiful. Her nails and skin were very delicate. She had decorated her body with all kinds of ornaments and a very beautiful fine sari was adorning her body.॥13-14॥ |
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