श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 152: हिडिम्बका आना, हिडिम्बाका उससे भयभीत होना और भीम तथा हिडिम्बासुरका युद्ध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.152.12 
वैशम्पायन उवाच
तथा संजल्पतस्तस्य भीमसेनस्य भारत।
वाच: शुश्राव ता: क्रुद्धो राक्षस: पुरुषादक:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीमसेन के कहे हुए उपरोक्त वचन सुनकर वह नरभक्षी राक्षस हिडिम्ब क्रोध से भर गया॥12॥
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! That cannibal demon Hidimba was filled with anger when he heard the above words spoken by Bhimasena.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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