श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.151.9 
अष्टौ दंष्ट्रा: सुतीक्ष्णाग्राश्चिरस्यापातदुस्सहा:।
देहेषु मज्जयिष्यामि स्निग्धेषु पिशितेषु च॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'आज बहुत समय के बाद मैं अपनी आठ दाढ़ें, जिनके अग्रभाग बहुत तीखे हैं और जिनके प्रहार प्रारम्भ से ही अत्यन्त असह्य हैं, मनुष्यों के शरीर और चिकने मांस में डुबाऊँगा।॥9॥
 
'Today, after a long period of time, I will dip my eight molars, whose tips are very sharp and whose blows are extremely unbearable from the very beginning, into the bodies and smooth flesh of human beings.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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