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mahabharat 1.151.8: आज बहुत दिनों के बाद मुझे ऐसा भोजन मिला है जो मुझे बहुत प्रिय है। इस समय मेरी जीभ बड़े आनन्द से लपलपा रही है॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.151.8 
उपपन्नश्चिरस्याद्य भक्षोऽयं मम सुप्रिय:।
स्नेहस्रवान् प्रस्रवति जिह्वा पर्येति मे सुखम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
आज बहुत दिनों के बाद मुझे ऐसा भोजन मिला है जो मुझे बहुत प्रिय है। इस समय मेरी जीभ बड़े आनन्द से लपलपा रही है॥8॥
 
‘Today after a long time I have got food which I like very much. At this moment my tongue is drooling and lapping with great pleasure.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)