श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.151.35 
न हि मे राक्षसा भीरु सोढुं शक्ता: पराक्रमम्।
न मनुष्या न गन्धर्वा न यक्षाश्चारुलोचने॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
कायर! सुलोचने! राक्षस, मनुष्य, गंधर्व और यक्ष भी मेरा पराक्रम सहन नहीं कर सकते ॥35॥
 
Coward! Sulochane! Even demons, humans, Gandharvas and Yakshas cannot bear my bravery. 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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