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mahabharat 1.151.34: भीमसेन बोले, "हे राक्षसी! मेरे भाई और माता इस वन में शांतिपूर्वक सो रहे हैं। मैं तुम्हारे दुष्ट भाई के भय से उन्हें नहीं जगाऊँगा।"   |   mahabharat अध्याय 1.151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.151.34 
भीमसेन उवाच
सुखसुप्तान् वने भ्रातॄन् मातरं चैव राक्षसि।
न भयाद् बोधयिष्यामि भ्रातुस्तव दुरात्मन:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले, "हे राक्षसी! मेरे भाई और माता इस वन में शांतिपूर्वक सो रहे हैं। मैं तुम्हारे दुष्ट भाई के भय से उन्हें नहीं जगाऊँगा।"
 
Bhimasena said, "O demoness! My brothers and mother are sleeping peacefully in this forest. I will not wake them up for fear of your evil brother."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)