श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.151.28 
एतद् विज्ञाय धर्मज्ञ युक्तं मयि समाचर।
कामोपहतचित्ताङ्गीं भजमानां भजस्व माम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
'धर्मज्ञ! यह समझकर मेरे प्रति उचित व्यवहार कीजिए। मेरे शरीर और मन को कामदेव ने मथ डाला है। मैं आपकी दासी हूँ, कृपया मुझे स्वीकार कीजिए।॥28॥
 
'Dharmagya! Understanding this, please behave appropriately towards me. My body and mind have been churned by Kaamdev. I am your maid, please accept me.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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