Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.151.21-23: हिडिम्बा अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकती थी। वह नर-नारी के समान सुन्दर रूप धारण करके, लज्जाशील युवती की भाँति महाबाहु भीमसेन के पास धीरे-धीरे गई। उसके दिव्य आभूषण उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। फिर उसने हँसकर भीमसेन से इस प्रकार पूछा - 'हे परम सुन्दर पुरुष! आप कौन हैं और कहाँ से आए हैं? ये देवताओं के समान सुन्दर रूप वाले पुरुष कौन हैं, जो यहाँ सो रहे हैं?'॥ 21-23॥ | mahabharat अध्याय 1.151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हिडिम्बा अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकती थी। वह नर-नारी के समान सुन्दर रूप धारण करके, लज्जाशील युवती की भाँति महाबाहु भीमसेन के पास धीरे-धीरे गई। उसके दिव्य आभूषण उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। फिर उसने हँसकर भीमसेन से इस प्रकार पूछा - 'हे परम सुन्दर पुरुष! आप कौन हैं और कहाँ से आए हैं? ये देवताओं के समान सुन्दर रूप वाले पुरुष कौन हैं, जो यहाँ सो रहे हैं?'॥ 21-23॥
Hidimba could assume any form she wished. Having assumed a beautiful form like that of a human woman, she slowly went to the mighty-armed Bhimasena like a shy maiden. Her divine ornaments were enhancing her beauty. Then she smiled and asked Bhimasena thus—'O most beautiful man! Who are you and where have you come from? Who are these men with beautiful forms like those of the gods, who are sleeping here?॥ 21-23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥