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mahabharat 1.151.19-20: मेरे भाई के वचन क्रूरता से भरे हुए हैं, इसलिए मैं उनका पालन कभी नहीं करूँगी। (स्त्री के हृदय में) पति का प्रेम बहुत प्रबल होता है। भाई की दया वैसी नहीं होती। यदि हम उन सबको मार डालें, तो भी उनका मांस मुझे और मेरे भाई को केवल दो क्षण के लिए तृप्ति देगा, और यदि मैं उन्हें न मारूँ, तो मैं उनके साथ बहुत वर्षों तक भोग करूँगी।॥19-20॥   |   mahabharat अध्याय 1.151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  1.151.19-20 
नाहं भ्रातृवचो जातु कुर्यां क्रूरोपसंहितम्।
पतिस्नेहोऽतिबलवान् न तथा भ्रातृसौहृदम्॥ १९॥
मुहूर्तमेव तृप्तिश्च भवेद् भ्रातुर्ममैव च।
हतैरेतैरहत्वा तु मोदिष्ये शाश्वती: समा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मेरे भाई के वचन क्रूरता से भरे हुए हैं, इसलिए मैं उनका पालन कभी नहीं करूँगी। (स्त्री के हृदय में) पति का प्रेम बहुत प्रबल होता है। भाई की दया वैसी नहीं होती। यदि हम उन सबको मार डालें, तो भी उनका मांस मुझे और मेरे भाई को केवल दो क्षण के लिए तृप्ति देगा, और यदि मैं उन्हें न मारूँ, तो मैं उनके साथ बहुत वर्षों तक भोग करूँगी।॥19-20॥
 
‘My brother's words are full of cruelty, so I will never follow them. (In a woman's heart) the love of a husband is very strong. The kindness of a brother is not like that. If we kill all of them, their flesh will give me and my brother satisfaction for only two moments, and if I do not kill them, I will enjoy with them for many years.'॥ 19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)