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mahabharat 1.151.17: पृथ्वी पर उगने वाले सखू के पौधे के समान सुन्दर भीमसेन को देखते ही वह राक्षसी (मोहित हो गई) उनसे प्रेम करने लगी। इस पृथ्वी पर वे अतुलनीय रूपवान थे। 17॥   |   mahabharat अध्याय 1.151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 151: हिडिम्बके भेजनेसे हिडिम्बा राक्षसीका पाण्डवोंके पास आना और भीमसेनसे उसका वार्तालाप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.151.17 
दृष्ट्वैव भीमसेनं सा शालपोतमिवोद्‍गतम्।
राक्षसी कामयामास रूपेणाप्रतिमं भुवि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी पर उगने वाले सखू के पौधे के समान सुन्दर भीमसेन को देखते ही वह राक्षसी (मोहित हो गई) उनसे प्रेम करने लगी। इस पृथ्वी पर वे अतुलनीय रूपवान थे। 17॥
 
As soon as she saw Bhimsen, who was as handsome as the Sakhu plant growing on the earth, the Rakshasi (be enthralled) started loving him. He was incomparably beautiful on this earth. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)