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mahabharat 1.150.7: भीमसेन अपनी सुकुमार एवं यशस्वी माता कुन्ती को अपनी पीठ पर उठाकर बड़ी कठिनाई से नदी के ऊँचे-नीचे तटों पर ले जाते थे।   |   mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.150.7 
कृच्छ्रेण मातरं चैव सुकुमारीं यशस्विनीम्।
अवहत् स तु पृष्ठेन रोधस्सु विषमेषु च॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन अपनी सुकुमार एवं यशस्वी माता कुन्ती को अपनी पीठ पर उठाकर बड़ी कठिनाई से नदी के ऊँचे-नीचे तटों पर ले जाते थे।
 
Bhimasena used to carry his delicate and illustrious mother Kunti on his back with great difficulty over the high and low banks of the river. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)