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mahabharat 1.150.5: जब भीमसेन गरुड़ और वायु के समान वेग से चलते थे, तब उनके महान वेग से पाण्डवों के अन्य पुत्र मूर्छित हो जाते थे ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.150.5 
गच्छतस्तस्य वेगेन तार्क्ष्यमारुतरंहस:।
भीमस्य पाण्डुपुत्राणां मूर्च्छेव समजायत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब भीमसेन गरुड़ और वायु के समान वेग से चलते थे, तब उनके महान वेग से पाण्डवों के अन्य पुत्र मूर्छित हो जाते थे ॥5॥
 
When Bhimasena moved with the speed of Garuda and the wind, the other sons of Pandava would faint because of his great speed. ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)