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mahabharat 1.150.35: जो बलवान, धनवान और अपने बन्धु-बान्धवों को सुख पहुँचाने वाले हैं, वे वन के वृक्षों के समान एक-दूसरे पर आश्रित रहकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.150.35 
बलवन्त: समृद्धार्था मित्रबान्धवनन्दना:।
जीवन्त्यन्योन्यमाश्रित्य द्रुमा: काननजा इव॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जो बलवान, धनवान और अपने बन्धु-बान्धवों को सुख पहुँचाने वाले हैं, वे वन के वृक्षों के समान एक-दूसरे पर आश्रित रहकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं ॥35॥
 
'Those who are strong, wealthy and bring joy to their friends and relatives, they sustain their lives by depending on each other like the trees in the forest. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)