Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.150.33: 'यदि किसी गाँव में एक ही वृक्ष हो जो पत्तों, फलों और फूलों से भरा हो, चाहे उसमें अन्य वृक्ष न भी हों, तो भी उसे चैत्य (देववृक्ष) माना जाता है और उसे पूजनीय मानकर उसकी बहुत पूजा की जाती है।॥ 33॥ | mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एको वृक्षो हि यो ग्रामे भवेत् पर्णफलान्वित:।
चैत्यो भवति निर्ज्ञातिरर्चनीय: सुपूजित:॥ ३३॥
अनुवाद
'यदि किसी गाँव में एक ही वृक्ष हो जो पत्तों, फलों और फूलों से भरा हो, चाहे उसमें अन्य वृक्ष न भी हों, तो भी उसे चैत्य (देववृक्ष) माना जाता है और उसे पूजनीय मानकर उसकी बहुत पूजा की जाती है।॥ 33॥
'If there is only one tree in a village which is full of leaves, fruits and flowers, even if it is devoid of other similar trees, it is considered a Chaitya (Dev Vriksha) and is worshipped a lot as it is considered worthy of worship.॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥