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mahabharat 1.150.32: जिस मनुष्य के सम्बन्धी पक्षपात नहीं करते और जो कुल को कलंकित नहीं करते, वह इस संसार में गाँव में एकाकी वृक्ष के समान सुखपूर्वक रहता है॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.150.32 
ज्ञातयो यस्य नैव स्युर्विषमा: कुलपांसना:।
स जीवेत सुखं लोके ग्रामद्रुम इवैकज:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जिस मनुष्य के सम्बन्धी पक्षपात नहीं करते और जो कुल को कलंकित नहीं करते, वह इस संसार में गाँव में एकाकी वृक्ष के समान सुखपूर्वक रहता है॥ 32॥
 
'A man whose relatives are not biased and do not bring disgrace to the family, lives happily in this world like a solitary tree in a village.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)