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mahabharat 1.150.3: जो भी पौधे या फल-फूलों से लदे हुए झाड़ियां उनके रास्ते में आते, वे उन्हें तोड़कर पैरों तले रौंद देते।   |   mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.150.3 
स मृद्नन् पुष्पितांश्चैव फलितांश्च वनस्पतीन्।
अवरुज्य ययौ गुल्मान् पथस्तस्य समीपजान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जो भी पौधे या फल-फूलों से लदे हुए झाड़ियां उनके रास्ते में आते, वे उन्हें तोड़कर पैरों तले रौंद देते।
 
Whatever plants and bushes laden with fruits and flowers were near their path, they would pluck them and trample them under their feet. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)