श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.150.28 
किं नु दु:खतरं शक्यं मया द्रष्टुमत: परम्।
योऽहमद्य नरव्याघ्रान् सुप्तान् पश्यामि भूतले॥ २८॥
 
 
अनुवाद
'आज अपने सबसे अच्छे भाइयों को जमीन पर सोते हुए देखने से बड़ा दुःख मुझे और क्या हो सकता है?'
 
'What greater sorrow can I see than to have to see my best brothers sleeping on the ground today?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)