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mahabharat 1.150.27: धर्म, इन्द्र और वायु के द्वारा हम जैसे पुत्रों को जन्म देने वाली रानी कुन्ती, जो राजमहल में सोती थी, आज अपने परिश्रम से थककर भूमि पर लेटी हुई है॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 1.150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.150.27 
धर्मादिन्द्राच्च वाताच्च सुषुवे या सुतानिमान्।
सेयं भूमौ परिश्रान्ता शेते प्रासादशायिनी॥ २७॥
 
 
अनुवाद
धर्म, इन्द्र और वायु के द्वारा हम जैसे पुत्रों को जन्म देने वाली रानी कुन्ती, जो राजमहल में सोती थी, आज अपने परिश्रम से थककर भूमि पर लेटी हुई है॥ 27॥
 
'Queen Kunti, who gave birth to sons like us through Dharma, Indra and Vayu, who used to sleep in the royal palace, is today lying down on the ground, exhausted by her hard work.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)