vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 150: माता कुन्तीके लिये भीमसेनका जल ले आना, माता और भाइयोंको भूमिपर सोये देखकर भीमका विषाद एवं दुर्योधनके प्रति क्रोध
»
श्लोक 21
श्लोक
1.150.21
स सुप्तां मातरं दृष्ट्वा भ्रातृृंश्च वसुधातले।
भृशं शोकपरीतात्मा विललाप वृकोदर:॥ २१॥
अनुवाद
अपनी माता और भाइयों को भूमि पर पड़ा देखकर भीमसेन हृदय में अत्यंत दुःखी हो गए और इस प्रकार विलाप करने लगे॥21॥
Seeing his mother and brothers lying on the ground, Bhimasena became extremely sad in his heart and began to lament as follows:॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×